छत्तीसगढ़

हाईकोर्ट ने रद्द की छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल की रजिस्ट्रार नियुक्ति

Shantanu Roy
12 March 2026 9:52 PM IST
हाईकोर्ट ने रद्द की छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल की रजिस्ट्रार नियुक्ति
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Bilaspur. बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद पर की गई नियुक्ति को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के पास सीधे रजिस्ट्रार नियुक्त करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि इस संबंधी कानूनी प्रावधानों के अनुसार नियुक्ति का अधिकार केवल काउंसिल के पास है।
मामला और याचिका
यह मामला डॉ. राकेश गुप्ता की याचिका से जुड़ा है। याचिका में उन्होंने 14 मार्च 2024 को राज्य सरकार द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी थी। इस आदेश के तहत स्टोर कीपर अश्वनी गुरडेकर को छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद का प्रभार सौंपा गया था। याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी कि Pharmacy Act, 1948 की धारा 26 के अनुसार रजिस्ट्रार की नियुक्ति राज्य फार्मेसी काउंसिल द्वारा ही की जानी चाहिए। इसके लिए केवल राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति आवश्यक है, लेकिन इस मामले में राज्य सरकार ने प्रत्यक्ष आदेश जारी कर नियुक्ति कर दी, जो कानून के प्रावधानों के विपरीत है।
कोर्ट का निर्णय
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि नियुक्ति या प्रभार देने से पहले काउंसिल की ओर से कोई प्रस्ताव या निर्णय नहीं लिया गया था। कोर्ट ने कहा कि जब कानून किसी कार्य को करने का निश्चित तरीका निर्धारित करता है, तो वही तरीका अपनाना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि अश्वनी गुरडेकर वर्तमान में डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल हॉस्पिटल में स्टोर कीपर के पद पर कार्यरत हैं और नियमों में निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करते। इसलिए नियुक्ति अवैध ठहराई गई और राज्य सरकार के आदेश 14 मार्च 2024 को निरस्त कर दिया गया।
नई नियुक्ति प्रक्रिया की दिशा निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिए कि वे रजिस्ट्रार पद के लिए नई प्रक्रिया कानून के अनुसार शुरू करें। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि काउंसिल स्वयं Pharmacy Act, 1948 और संबंधित नियमों के तहत नई नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश केवल वर्तमान मामले पर लागू होगा, लेकिन भविष्य में किसी भी नियुक्ति में कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
कानूनी और प्रशासनिक महत्व
इस फैसले से स्पष्ट हो गया है कि कानून द्वारा तय प्रक्रिया का पालन करना राज्य प्रशासन और काउंसिल दोनों के लिए अनिवार्य है। राज्य सरकार सीधे नियुक्ति नहीं कर सकती; काउंसिल की सिफारिश और नियमों के अनुसार प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है। यह फैसला अन्य सरकारी और अर्ध-सरकारी निकायों के लिए भी उदाहरण पेश करता है कि कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का उल्लंघन गंभीर परिणाम ला सकता है। काउंसिल अब नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयारी करेगी। इसमें पद की पात्रता, योग्यता, आवेदन प्रक्रिया और चयन मानदंड की पूरी समीक्षा की जाएगी। नियुक्ति कानून और नियमों के अनुरूप होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की कानूनी चुनौती न उठे।
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